दूध का कर्ज : Heart Touching Inspirational stories

∗ दूध का कर्ज ∗

– Heart Touching Inspirational stories –

दूध का कर्ज

अंधेरा हो चुका था। एयरपोर्ट के बाहर गहमागहमी कम हो चुकी थी। “माजी…,किससे मिलना है?”, एक कर्मचारी ने वृद्धा से पूछा। “मेरा बेटा अंदर गया था….. टिकिट लेने, वो मुझे अमेरिका लेकर जा रहा है….”, सावित्री देवी ने घबराकर कहा। “लेकिन अंदर तो कोई पैसेंजर नहीं है, अमेरिका जाने वाली फ्लाइट तो दोपहर मे ही चली गई। ……

मित्रों,

दो अलग अलग व्यक्ति दूध का कर्ज कैसे चुकाते हैं. इसका चित्रण करती दो हृदयस्पर्शी कहनियाँ प्राप्त हुई है. जिनको आज आपके साथ SAHISAMAYBLOG पर शेयर करते हैं. Make the difference.

पहली स्टोरी

हैलो माँ … में रवि बोल रहा हूँ…., कैसी हो माँ….? मैं….मैं…ठीक हूँ बेटे…..,ये बताओ तुम और बहू दोनों कैसे हो? हम दोनों ठीक हैं माँ…आपकी बहुत याद आती है…,..अच्छा सुनो माँ, में अगले महीने इंडिया आ रहा हूँ…..तुम्हें लेने। क्या…? हाँ माँ….,अब हम सब साथ ही रहेंगे….,नीतू कह रही थी माज़ी को अमेरिका ले आओ वहाँ अकेली बहुत परेशान हो रही होंगी। हैलो ….सुन रही हो माँ…?

“हाँ…हाँ बेटे…“, बूढ़ी आंखो से खुशी की अश्रुधारा बह निकली, बेटे और बहू का प्यार नस नस में दौड़ने लगा। जीवन के सत्तर साल गुजार चुकी सावित्री ने जल्दी से अपने पल्लू से आँसू पोंछे और बेटे से बात करने लगी। पूरे दो साल बाद बेटा घर आ रहा था। बूढ़ी सावित्री ने मोहल्ले भर में दौड़ दौड़ कर ये खबर सबको सुना दी। सभी खुश थे की चलो बुढ़ापा चैन से बेटे और बहू के साथ गुजर जाएगा।

रवि अकेला आया था, उसने कहा की माँ हमे जल्दी ही वापिस जाना है इसलिए जो भी रुपया पैसा किसी से लेना है वो लेकर रखलों और तब तक मैं किसी प्रोपेर्टी डीलर से मकान की बात करता हूँ। “मकान…?”, माँ ने पूछा। हाँ माँ, अब ये मकान बेचना पड़ेगा वरना कौन इसकी देखभाल करेगा। हम सब तो अब अमेरिका मे ही रहेंगे। बूढ़ी आंखो ने मकान के कोने कोने को ऐसे निहारा जैसे किसी अबोध बच्चे को सहला रही हो। आनन फानन और औने-पौने दाम मे रवि ने मकान बेच दिया।

सावित्री देवी ने वो जरूरी सामान समेटा जिस से उनको बहुत ज्यादा लगाव था। रवि टैक्सी मँगवा चुका था। एयरपोर्ट पहुँचकर रवि ने कहा,”माँ तुम यहाँ बैठो मे अंदर जाकर सामान की जांच और बोर्डिंग और विजा का काम निपटा लेता हूँ।“ “ठीक है बेटे।“,सावित्री देवी वही पास की बेंच पर बैठ गई। काफी समय बीत चुका था। बाहर बैठी सावित्री देवी बार बार उस दरवाजे की तरफ देख रही थी जिसमे रवि गया था लेकिन अभी तक बाहर नहीं आया। ‘शायद अंदर बहुत भीड़ होगी…’,सोचकर बूढ़ी आंखे फिर से टकटकी लगाए देखने लगती।

अंधेरा हो चुका था। एयरपोर्ट के बाहर गहमागहमी कम हो चुकी थी। “माजी…,किससे मिलना है?”, एक कर्मचारी ने वृद्धा से पूछा। “मेरा बेटा अंदर गया था….. टिकिट लेने, वो मुझे अमेरिका लेकर जा रहा है….”, सावित्री देवी ने घबराकर कहा। “लेकिन अंदर तो कोई पैसेंजर नहीं है, अमेरिका जाने वाली फ्लाइट तो दोपहर मे ही चली गई। क्या नाम था आपके बेटेका?”, कर्मचारी ने सवाल किया। “र….रवि….”, सावित्री के चेहरे पे चिंता की लकीरें उभर आई। कर्मचारी अंदर गया और कुछ देर बाद बाहर आकर बोला, “माजी….आपका बेटा रवि तो अमेरिका जाने वाली फ्लाइट से कब का जा चुका…।”

“क्या.? ” वृद्धा कि आखो से आँसुओं का सैलाब फुट पड़ा। बूढ़ी माँ का रोम रोम कांप उठा। किसी तरह वापिस घर पहुंची जो अब बिक चुका था। रात में घर के बाहर चबूतरे पर ही सो गई। सुबह हुई तो दयालु मकान मालिक ने एक कमरा रहने को दे दिया। पति की पेंशन से घर का किराया और खाने का काम चलने लगा। समय गुजरने लगा।

एक दिन मकान मालिक ने वृद्धा से पूछा। “माजी… क्यों नही आप अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ चली जाए, अब आपकी उम्र भी बहुत हो गई, अकेली कब तक रह पाएँगी।“

“हाँ, चली तो जाऊँ, लेकिन कल को मेरा बेटा आया तो..?, यहाँ फिर कौन उसका ख्याल रखेगा?“……आखँ से आसू आने लग गए…

दोस्तों….!!! माँ बाप का दिल कभी मत दुखाना। दोस्तों मेरी आपसे ये हाथ जोड़कर विनती है ये पोस्ट को अपने दोस्तों केसाथ जरुर शेयर करे । धन्यवाद आप सबका जो आपने अपना कीमती समय निकाल कर इस पोस्ट को दिया।

 दूध का कर्ज (2)

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This Inspirational heart touching Story, I have received from Shri Prakash Singh Detha, Bikaner (Rajasthan). Thanks a lot dear Prakash Singh Detha.

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दूसरी स्टोरी

एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था, एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे

बड़े जोर से भूख भी लग रही थी.

उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा.

दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजा खोला, जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उसने पानी का एक गिलास पानी माँगा.

लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक बड़ा गिलास दूध का ले आई.

लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया. “कितने पैसे दूं?”

लड़की ने जवाब में कहा. “माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए.” “तो फिर मैं आपको दिल से धन्यबाद देता हूँ.”

जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा, उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकी थी बल्कि उसका भगवान् और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था.

सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप

से बीमार पड़ गयी.

लोकल डॉक्टर ने उसे शहर के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया.

विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया.

जैसे ही उसने लड़की के कस्बे का नाम सुना, उसकी आँखों में चमक आ गयी.

वह एकदम सीट से उठा और उस लड़की के कमरे में गया.

उसने उस लड़की को देखा, एकदम पहचान लिया और तय कर

लिया कि वह उसकी जान बचाने के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा.

उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी और उस लड़की कि जान बच गयी.

डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस

में जा कर उस लड़की के इलाज का बिल लिया.

उस बिल के कौने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया.

लड़की बिल का लिफाफा देखकर घबरा गयी, उसे मालूम था कि वह बीमारी से तो वह बच गयी है लेकिन बिल कि रकम जरूर उसकी जान ले लेगी.

फिर भी उसने धीरे से बिल खोला, रकम को देखा और फिर अचानक उसकी नज़र बिल के कोने में पेन

से लिखे नोट पर गयी, जहाँ लिखा था, “एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चुका है” नीचे डॉक्टर होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे.

ख़ुशी और अचम्भे से उस लड़की के गालों पर आंसू अपक पड़े उसने

ऊपर कि और दोनों हाथ उठा कर कहा, “हे भगवान! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद,

आपका प्यार इंसानों के दिलों और

हाथों द्वारा न जाने कहाँ-कहाँ फैल

चुका है.”

अब आपको दो में से एक चुनाव करना है.

या तो आप इसे शेयर करके इस सन्देश को हर जगह पहुंचाएं या इसे स्वयं तक ही सीमित रखें.

 दूध का कर्ज

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This Inspirational heart touching Story, I have received from Shri Ganpat Singh Jat, Barmer (Rajasthan). Thanks a lot dear Ganpat Singh Jat.

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