रहीम के दोहे अर्थ सहित | Rahim Quotes in Hindi

∗रहीम के दोहे∗

– Rahim Ke Dohe –

 Rahimji रहीमजी

(रहीमजी)

“एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।

रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥”

अर्थ : एक ही काम को हाथ में लेकर उसे पूरा कर लो. सबमें अगर हाथ डाला, तो एक भी काम बनने का नहीं. रहीमजी कहते हैं पेड़ की जड़ को यदि तुमने सींच लिया, तो उसके फूलों और फलों को पूर्णतया प्राप्त कर लोगे. – रहीमजी.

मित्रों,

रहीमजी जैसे प्रेरक महापुरुषों के उत्कृष्ट विचारों से ओतप्रोत होने से हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का भरपूर संचार होता है. नवजीवन का संचार होता है. अच्छे विचारों से हम Innovative व Courageous कार्य करने की क्षमता अर्जित करते हैं. Personality development में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. रहीमजी ने अनमोल वचनों को दोहों के रूप में व्यक्त किया है. रहीमजी के कुछ दोहे वास्तव में हमारे जीवन का सही प्रबंधन (Right Management of Life) करने वाले हैं. मैने आज तक के अध्ययन में रहीमजी के जिन दोहों को सर्वोत्तम महसूस किया है, उनको आज SHISAMAYBLOG पर Share करते हैं :

Rahimji रहीमजी

Rahimji रहीमजी

जीवन परिचय

नामAbdul Rahim Khan-e-Khana / अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना
जन्म तिथि17 December 1556.
जन्म स्थानलाहौर.
मृत्यु1626(aged 70)
मृत्यु स्थलDelhi, India.
निवासIndia.
कार्यक्षेत्रराजनीति, साहित्यकार.
उपलब्धियांअकबर के नौ रत्नों में से एक! राजनीतिवेत्ता, वीर- बहादुर योद्धा और भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का आदर्श प्रस्तुत करने वाले मर्मी कवि माने जाते हैं. उनकी गिनती विगत चार शताब्दियों से ऐतिहासिक पुरुष के अलावा भारत माता के सच्चे सपूत के रुप में किया जाता रहा है.

 Rahimji रहीमजी (2)

1.

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।

रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥

अर्थ : एक ही काम को हाथ में लेकर उसे पूरा कर लो. सबमें अगर हाथ डाला, तो एक भी काम बनने का नहीं. रहीमजी कहते हैं पेड़ की जड़ को यदि तुमने सींच लिया, तो उसके फूलों और फलों को पूर्णतया प्राप्त कर लोगे.

2.

पावष देख रहिम मन, कोयल साधे मौन।

अब दादुर वक्ता भये, हमको पूछत कौन॥

अर्थ : वर्षा ऋतु को देखकर कोयल और रहीम के मन ने मौन साध लिया है. अब तो मेंढक ही बेसुरी आवाज में टर्राते हैं. हमारी तो कोई बात ही नहीं सुनता. अभिप्राय यह है कि कुछ अवसर ऐसे आते हैं, जब गुणवान को चुप रह जाना पड़ता है. उनका कोई आदर नहीं करता और गुणहीन वाचाल व्यक्तियों का ही बोलबाला हो जाता है.

3.

रहिमन औछे नरन सों, बैर भलो न प्रीत।

काटे चाटे स्वान के, दोउ भांति विपरीत॥

अर्थ : कम दिमाग के व्यक्तियों से ना तो प्रीती और ना ही दुश्मनी अच्छी होती है. जैसे कुत्ता चाहे काटे या चाटे दोनों को विपरीत नहीं माना जाता है.

4.

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय॥

अर्थ : दुख में भगवान सभी लोग याद करते हैं, सुख में कोई नहीं. यदि सुख में भी याद करते तो दुख होता ही नहीं.

5.

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

अर्थ : बड़े होने का यह मतलब नहीं है कि उससे किसी का भला हो. जैसे खजूर का पेड़ तो बहुत बड़ा होता है परन्तु उससे चलते राहगीर न छाया और न उसका फल क्योंकि फल भी इतना ऊपर होता है कि उसको लेना मुश्किल है.

6.

रहिमन वे नर मर गये, जे कछु माँगन जाहि।

उनते पहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि॥

अर्थ : जो व्यक्ति किसी से कुछ मांगने के लिए जाता है वो तो मरे हुए हैं ही. परन्तु उससे पहले ही वे लोग मर जाते हैं, जिनके मुंह से नहीं निकलता है.

7.

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर।

जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥

अर्थ : जब बुरे दिन आए हों तो चुप ही बैठना चाहिए. क्योंकि जब अच्छे दिन आते हैं, तब बात बनते देर नहीं लगती.

8.

रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।

जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि॥

अर्थ : बड़ों को देखकर छोटों को डरा कर भगा नहीं देना चाहिए. क्योंकि जहां छोटे का काम होता है वहां बड़ा कुछ नहीं कर सकता. जैसे कि सुई के काम को तलवार नहीं कर सकती.

9.

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।

टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥

अर्थ : प्रेम रूपी धागे को कभी चटका कर तोड़ना नहीं चाहिए. क्योंकि यह यदि एक बार टूट जाता है तो फिर दुबारा नहीं जुड़ता है, और यदि जुड़ता भी है तो गांठ तो पड़ ही जाती है.

10.

बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।

रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥

अर्थ : जब बात बिगड़ जाती है तो किसी के लाख कोशिश करने पर भी बनती नहीं है. उसी तरह जैसे कि फटे हुए दूध को मथने से मक्खन नहीं निकलता.

11.

बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।

औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥

अर्थ : अपने मन से अहंकार को निकालकर ऐसी बात करनी चाहिए जिसे सुनकर मन को ख़ुशी मिले. ऐसी वाणी से दूसरों को खुशी मिलती है, और खुद भी ख़ुश रहते है.

12.

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।

पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥

अर्थ : इस दोहे में रहीम ने पानी को तीन अर्थों में प्रयोग किया है. पानी का पहला अर्थ मनुष्य के संदर्भ में है जब इसका मतलब इज्जत से है. रहीम कह रहे हैं कि मनुष्य में हमेशा इज्जत (पानी) से रहना चाहिए. पानी का दूसरा अर्थ आभा, तेज या चमक से है जिसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं. पानी का तीसरा अर्थ जल से है जिसे आटे (चून) से जोड़कर दर्शाया गया है. रहीम का कहना है कि जिस तरह आटा पानी के बिना काम नहीं आ सकता और मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने व्यवहार में हमेशा इज्जत से रहना चाहिए, जिसके बिना उसका कोई मूल्य नहीं होता है.

13.

खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।

रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥

अर्थ : दुनिया जानती है कि खैरियत, खून, खांसी, खुशी, दुश्मनी, प्रेम और मदिरा का नशा छुपाए नहीं छुपता है.

14.

तरुवर फल नहीं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥

अर्थ : वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते हैं और सरोवर भी अपना पानी स्वयं नहीं पीती है. इसी तरह अच्छे और सज्जन व्यक्ति वो हैं जो दूसरों के कार्य के लिए संपत्ति को संचित करते हैं.

15.

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार।

रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार॥

अर्थ : यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे, तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए, क्योंकि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पिरो लेना चाहिए.

16.

छिमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात।

कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

अर्थ : बड़ों को क्षमा शोभा देती है और छोटों को उत्पात (बदमाशी). अर्थात अगर छोटे बदमाशी करें कोई बड़ी बात नहीं और बड़ों को इस बात पर क्षमा कर देना चाहिए. छोटे अगर उत्पात मचाएं तो उनका उत्पात भी छोटा ही होता है. जैसे यदि कोई कीड़ा (भृगु) अगर लात मारे भी तो उससे कोई हानि नहीं होती.

17.

समय पाय फल होत है, समय पात झर जाय।

सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात॥

अर्थ : रहीम कहते हैं कि उपयुक्त समय आने पर वृक्ष में फल लगता है. झड़ने का समय आने पर वह झड़ जाता है. सदा किसी की अवस्था एक जैसी नहीं रहती, इसलिए दुःख के समय पछताना व्यर्थ है.

18.

वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।

बाँटनवारे को लगै, ज्यौं मेंहदी को रंग॥

अर्थ : वे पुरुष धन्य हैं जो दूसरों का उपकार करते हैं. उन पर गौरव का रंग उसी तरह उकर आता है जैसे कि मेंहदी लगाने वाले को अलग से मेंहदी लगाने की जरूरत नहीं होती.

19.

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार।

रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार॥

अर्थ : यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे, तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए,क्योंकि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पिरो लेना चाहिए.

20.

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग।

चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥

अर्थ : रहीम कहते हैं कि जो अच्छे स्वभाव के मनुष्य होते हैं, उनको बुरी संगति भी बिगाड़ नहीं पाती. जहरीले सांप चन्दन के वृक्ष से लिपटे रहने पर भी उस पर कोई जहरीला प्रभाव नहीं डाल पाते.

21.

बड़े बड़ाई ना करें, बड़ो न बोले बोल।

रहिमन हीरा कब कहे, लाख हमारो मोल॥

अर्थ : बड़े लोग वो हैं जो अपनी बड़ाई नहीं करते हैं, और न ही बड़ी डींगें हांकते हैं. रहीमजी आगे बताते हैं कि वे हीरे की तरह हैं, जो कभी अपना मूल्य लाखों नहीं बताता है.

 Rahimji रहीमजी (3)

Tomb of Abdul Rahim Khan-I-Khana, Nizamuddin East, Delhi, India.

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