वन्य प्राणी सप्ताह | Wildlife Week in Hindi

∗ वन्य प्राणी सप्ताह ∗

– Wildlife Week –

(अक्टूबर माह का पहला सप्ताह)

Wildlife Week

National Wild Life Week :

यू.एस.ए. में National Wild Life Week नेशनल वाइल्डलाइफ फेडरेशन (एन.डब्ल्यू.एफ.) द्वारा 1938 से मनाया जा रहा है. यह वाइल्डलाइफ शिक्षा का सबसे लम्बा कार्यक्रम होता है. इस अभियान के तीन उदेश्य हैं :

  1. समुदायों व परिवारों को प्रकृति से जोड़ना,
  2. संरक्षण की भावना पैदा करना तथा
  3. वन्यजीव व पर्यावरण के प्रति जीवन पर्यन्त जागरुकता के लिये प्रेरित करना.

Wild Life Week in India :

भारत सरकार ने किसी भी भारतीय वन्यजीव प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के उद्देश्य से वर्ष 1952 में तत्कात प्रभाव से भारतीय वन्यजीव बोर्ड (IBWL) की स्थापना की. बोर्ड द्वारा वन्य जीव संरक्षण हेतु जनता को जागरुक करने के लिए निरंतर अग्रणी कार्य किये जा है.

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अति प्राचीन काल से, हमारे महाकाव्यों और हमारे इतिहास के साथ; हमारी पौराणिक मान्यताओं और हमारे folklores के साथ हमारे वन्य जीवों का निकट संबद्ध रहा है. विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों से ही प्रकृति के संतुलन का निर्माण होता है.

इन के बिना हमारा जीना दूभर हो जायेगा. वास्तव में वन्यजीव संरक्षण सक्रिय और योजनाबद्ध वन्यजीव प्रबंधन है. जिसमें मानव हितों को बिना हानि पहुँचाये सभी जीव जन्तु मानव के साथ साथ अपने अपने प्रभावक्षेत्र में उपयोगिता के अनुसार प्रगति करे. इस दृष्टिकोण को मध्यनजर रखते हुए देश भर में उपयुक्त इलाकों में वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की स्थापना कर इन्हें विकसित किया गया है.

वन्य जीवों की सुरक्षा के लिये आम आदमी में सामान्य जागृति लाने के लिये, भारतीय वन्य जीव बोर्ड (IBWL) ने Wild Life Week मनाने का निर्णय लिया और तब से अक्टूबर माह के पहला सप्ताह में हर वर्ष वन्यजीव conservation से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर इस सप्ताह Wild Life Week मनाया जाता है.

हर वर्ष अक्टूबर माह के पहला सप्ताह में केंद्र व राज्य सरकारों, पर्यावरणविदों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों आदि द्वारा लोगों में वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता में तेजी लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है.

भारत में विभिन्न प्रजातियों का विशाल भण्डार है. इसलिए भी भारत में कई सम्मेलनों, जागरूकता कार्यक्रमों, और प्रकृति प्रेमियों के बीच सार्वजनिक बैठकों का आयोजन किया जाता है. स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में बच्चों के लिए वन्यजीवों से संबंधित निबंध लेखन, चित्रकला, संभाषण, फिल्म स्क्रीनिंग आदि प्रयोगिताओं का आयोजन किया जाता है.

वन्य जीव सप्ताह मनाने की गंभीरता; स्कूली बच्चों, युवा लोगों और आम जनता को वन्य जीवन के बारे में शिक्षित व जागरूक करने के साथ साथ सरकार के काम करने में, नीतियों को डिजाइन करने में तथा आज के बदलते परिवेश में वन्यजीव संरक्षण के मुद्दों का समाधान करने में भी मदद करती है.

मित्रों,

मनुष्य के शरीर व मस्तिष्क को स्वस्थ व सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखने के लिये हमारे पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना अत्यावश्यक है. पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना वन व वन्यजीवों बिना असंभव है.

पेड़ पौधों की चर्चा तो अनेकानेक कार्यक्रमों में होती रहती है. वन्यजीवों की ओर ध्यानाकर्षण कम होता है. जबकि बिना वन्यजीवों के मनुष्य का अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा. इसलिए वन्यजीवों के महत्व को समझाने व इनके प्रति जागरुकता लाने के पूरे विश्व में लम्बा चलने वाला कार्यक्रम Wild Life Week मनाया जाता है.

प्रकृति, पेड़-पौधों व जीव-जन्तुओं की, जैवविविधता (Biodiversity) से परिपूर्ण है. मानव के लिये इसे समझना तो दूर, वह इसे पहचान भी नहीं पा रहा है. इन सब बातों को शब्दों बांधना नामुमकिन है. मैं ग्रीन हॉउस इफेक्ट, ब्लेक होल, केमिकल्स… आदि आदि की विस्तार में बात नहीं करुंगा. मैं यहाँ आपके साथ केवल एक उद्धरण शेयर करना चाहूँगा.

गिद्ध ऐसा पक्षी जो केवल मृत जानवर के शव (carcass) को ही खाता है. मृत जानवरों का निस्तारण (सफाई) बहुत मुश्किल कार्य है. इनके खुले में सड़ने से कई तरह की बिमारियां ही नहीं महामारियां फ़ैल सकती है. गिद्ध मानव का मुफ्त का सफाईकर्मी है. परन्तु उसके लालच ने उसको भी मार दिया. गिद्ध की Indian vulture (Gyps indicus) व कई अन्य भारतीय प्रजातियाँ प्राय: लुप्त हो चुकी है, या लुप्त होने की कगार पर है.

Indian vulture (Gyps indicus)

Indian vulture (Gyps indicus)

Environment Day (3)

मैनें स्वयं ने सन 2000 में गिद्धों के झुण्ड को मृत पशु खाते हुए गाँव – रत्ते का तला, तहसील – चौहटन जिला – बाड़मेर (राजस्थान) में अंतिम बार देखा. उसके बाद यात्राओं दौरान कभी नहीं देखा है. गिद्ध, पशुओं को दी जाने वाली दवाई डाईक्लोरोफेनेक (विशेषकर दूध निकालने वाले इंजेक्शन में प्रयुक्त होती है) के कारण मारे गये. डाईक्लोरोफेनेक सेवन किये हुए मृत जानवरों को खाने से ये गिद्ध मरने लगे.

सरकारी अमले और सरकार को जगने में देर लग गयी. 2005 में सरकार ने डाईक्लोरोफेनेक को जानवरों की दवाइयों के लिए प्रतिबंधित कर दिया. तब तक स्वदेशी गिद्ध की प्रजातियाँ लुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी थीं. अब देशी गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिये महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के रोहा में वल्चर रेस्टोरेंट, हरियाणा के पिंजोर में वल्चर प्रोजेक्ट.. आदि आदि से प्रयास किये जा रहे है. परन्तु परिणाम बहुत ही निराशाजनक हैं. दोस्तों, पर्यावरण संतुलन के लिये संपूर्ण जैवविविधता (Biodiversity) के संरक्षण की महती आवश्यकता है.

पुनश्च: मित्रों, वन्यजीवों प्रति जागरुकता चर्चाओं से ही संभव है. अत: आप सबसे भी निवेदन है कि वन्यजीव सप्ताह के दौरान तथा इसके आलावा भी जब कभी मौंका मिले तब वन्यजीवों के प्रति जागरुकता का अभियान जारी रखें.

Beautiful World of Wildlife

Wildlife Week (9)

Wildlife Week

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