“I HAVE A DREAM” Speech in Hindi : डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर

∗ I HAVE A DREAM ∗

  I HAVE A DREAM Martin Luther King Jr.

“मेरा एक सपना है कि एक दिन मेरे चारों छोटे- छोटे बच्चे एक ऐसे देश में रहेंगे

जहाँ उनका आंकलन उनकी चमड़ी के रंग से नहीं बल्कि उनके चरित्र  के बल पर किया जायेगा.”

— डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर.

डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर का I have a dream 20वीं शताब्दी का महानतम भाषण (Greatest speech) है. इस महान भाषण ने पूरे अमेरिका की दिशा और दशा बदल दी. मित्रों, ऐसे महान भाषण I have a dream को समझने के लिये देश की तत्कालीन एतिहासिक पृष्ठभूमि, Speaker की विचारधारा, समय व स्थान की जानकारी होना जरुरी है. मैं आपको इन सब की जानकारी कराने का पूरा प्रयास करुंगा.

एतिहासिक पृष्ठभूमि : अमेरिका 4 जुलाई 1776 को ग्रेट ब्रिटेन (UK) से आजाद हुआ था. अमेरिका के आजाद होने के बावजूद भी देश में चली आ रही गुलामी की प्रथा की समस्यायें यथावत थी. दक्षिणी राज्यों के गोरे लोग बड़े खेतों के स्वामी थे, और वे अफ्रीका से काले लोगों को अपने खेतों में काम करने के लिए लाते थे और उन्हें दास के रूप में रखते थे. उत्तरी राज्यों के लोग गुलामी की इस प्रथा के खिलाफ थे और इसे समाप्त करना चाहते थे. अमेरिका का संविधान नागरिकों की समानता पर आधारित था, इसलिए वहाँ गुलामी के लिए कोई जगह नहीं थी. परन्तु राज्यों में कुछ अलग-अलग कानून व प्रथाएँ प्रचलित थी.

गुलामी की प्रथा को लेकर उत्तरी व दक्षिणी राज्यों में मतभेद निरंतर बढ़ते जा रहे थे. 1850 के दशक में इस समस्या ने बहुत ही विकराल रूप धारण कर लिया था. अब्राहम लिंकन गुलामी की प्रथा के घोर विरोधी थे. ऐसे मुश्किल समय में, अब्राहम लिंकन 1860 में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे. वे गुलामी की समस्या को हल करना चाहते थे. दक्षिणी राज्यों के लोग गुलामी के उन्मूलन के खिलाफ थे, इसका और विस्तार चहाते थे. इससे देश की एकता खतरे में आ गयी थी. दक्षिणी राज्य एक नया देश बनाने की तैयारी कर रहे थे.

अब्राहम लिंकन सभी राज्यों को एकजुट रखना चाहते थे. अब्राहम लिंकन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. वह किसी भी कीमत पर देश की एकता की रक्षा करना चाहते थे. 1861 में उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच मौलिक अधिकारों (Civil Rights) को लेकर गृह युद्ध (Civil War) छिड़ गया. उन्होंने युद्ध बहादुरी से लड़ा और घोषणा की, “एक राष्ट्र आधा दास और आधा स्वतंत्र नहीं रह सकता” (A Nation cannot exist half free and half slave.).

अब्राहम लिंकन ने राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकार commander in chief of the armed forces; की शक्तियों का उपयोग कर मुक्ति उद्घोषणा (Emancipation Proclamation) के आदेश पर 01 जनवरी 1863को हस्ताक्षर कर गुलामी की प्रथा समाप्त कर दी. वह युद्ध जीत गए और देश एकजुट रहा. परन्तु 1863 से 1963 तक एक सौ साल बीत जाने के उपरांत भी उक्त मुक्ति उद्घोषणा (Emancipation Proclamation) का विधिवत पूर्णतया क्रियान्वयन नहीं हुआ.

डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर की विचारधारा : 1950 के दशक में डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर निग्रोज के नेता के रूप में उभरे. नेता के साथ-साथ वे महान वक्ता भी थे. मार्टिन लूथर किंग, महात्मा गाँधी की विचारधारा अहिंसा और सत्य (Truth & Non-Violence) को मानने वाले थे. कवि हृदय वाले धर्मशास्त्री (Theologian) थे.

भाषण समय व स्थान : मार्टिन लूथर किंग के नेतृत्व में निग्रोज ने अपनी स्वतंत्रता व समानता के लिये आन्दोलन शुरु दिये थे. आन्दोलनों की इसी कड़ी में 1963 में वाशिंगटन DC पर कूच किया गया. वाशिंगटन DC में लगभग 2,00,000 लोग इक्कठा हो गये थे. जिनमें मानवाधिकार के हिमायती काले-गोरे सभी लोग शामिल थे. मार्टिन लूथर किंग ने वाशिंगटन में Lincon Memorial के सामने 28, August, 1963 को I HAVE A DREAM” classic भाषण दिया था. ये घटना कालों (Blacks) के समानता के अधिकारों के लिये आन्दोलन में मील का पत्थर (major turn) साबित हुई.

1963 में अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी थे. केनेडी मानवाधिकारों के पक्के हिमायती थे. उन्होंने कानून बनाकर मौलिक नागरिक अधिकारों (Civil Rights) को लागू करवाने के जीवन पर्यन्त भरसक प्रयास किये.

आओ अब आपके साथ Martin Luther King Jr. की एतिहासिक SPEECH “I have a dream”  को  HINDI में  share करते हैं.

I HAVE A DREAM”

I HAVE A DREAM Martin Luther King Jr.

I have a dream SPEECH IN HINDI

मैं आज इस अवसर पर आपके साथ शामिल होकर खुश हूँ, ये इस देश के इतिहास में स्वतंत्रता के लिए किये गए विशालतम प्रदर्शन के रूप में जाना जायेगा.

सौ साल पहले, एक महान अमेरिकी, जिनकी प्रतीकात्मक छाया  में हम सभी खड़े हैं, ने एक मुक्ति उद्घोषणा (Emancipation Proclamation) पर हस्ताक्षर किये थे. इस महत्त्वपूर्ण निर्णय ने तिरस्कारपूर्ण अन्याय की आग में जल रहे लाखों गुलाम नीग्रोज के मन में उम्मीद की एक किरण जगा दी. यह खुशी उनके लिए लम्बे समय तक अन्धकार की कैद में रहने के बाद दिन के उजाले के जाने के समान थी.

परन्तु एकसौ साल बाद भी, नीग्रोज़ अभी तक स्वतंत्र नहीं हैं. एकसौ साल बाद भी, एक नीग्रो की ज़िन्दगी अलगाव की हथकड़ी और भेद-भाव की बेड़ियों में दुखद व पंगु है. एकसौ साल बाद भी, नीग्रो समृद्धि के विशाल समुद्र  के बीच गरीबी के एकांत द्वीप पर रहता है. एकसौ साल बाद भी, नीग्रो अमेरिकी समाज के ओणे-कोणे में सड़ रहा है और अपने ही देश में खुद को निर्वासित पाता है. इसलिए आज हम सभी यहाँ इस शर्मनाक स्थिति को प्रदर्शित करने के लिए इकठ्ठा हुए हैं.

सही मायने में हम अपने देश की राजधानी में एक चेक कैश करने आये हैं. जब हमारे गणतंत्र के आर्किटेक्ट संविधान और स्वतंत्रता की घोषणा बड़े ही भव्य शब्दों में लिख रहे थे, तब उन्होंने एक वचन-पत्र (promissory note) पर हस्ताक्षर किये, जिसका हरेक अमेरिकी उतराधिकारी होने वाला था. यह वचन-पत्र एक वादा था कि सभी व्यक्ति, हाँ, सभी व्यक्ति चाहे काले हों या गोरे, सभी को जीने, स्वाधीनता और अपनी प्रसन्नता के लिए अग्रसर रहने का पूरा अधिकार होगा.

आज यह स्पष्ट है कि अमेरिका अपने अश्वेत नागरिकों से यह वादा निभाने में चूक गया है. इस पवित्र दायित्व का सम्मान करने के बजाय, अमेरिका ने नीग्रो लोगों को एक खोटा चेक दिया है, एक ऐसा चेक जिसपर “अपर्याप्त कोष” लिखकर वापस कर दिया गया. लेकिन हम यह मानने से इंकार करते हैं कि, न्याय का बैंक दिवालिया (बैंकरप्ट) हो चुका है. हम यह मानने से भी इनकार करते हैं कि, इस देश में अवसर की महान तिजोरी में ‘अपर्याप्त कोष’ है. इसलिए हम इस चेक को कैश कराने आये हैं-एक ऐसा चेक जो मांगे जाने पर हमें संपूर्ण आजादी और न्याय की सुरक्षा देगा.

हम इस प्रतिष्ठित स्थान पर इसलिए भी आये हैं कि हम अमेरिका को याद दिला दें कि अब इसे तत्काल करने की सख्त आवश्यकता है. अब और शांत करने या धीरे-धीरे करने का दिलासा देने का वक़्त नहीं है. अब लोकतंत्र को दिए वचन को निभाने का वक़्त है. अब वक़्त है अँधेरी और निर्जन घाटी से निकलकर नस्लीय  न्याय (racial justice) के प्रकाशित मार्ग पर चलने का. अब वक़्त है अपने देश को नस्लीय अन्याय के दलदल से निकाल कर भाई-चारे की ठोस चट्टान पर खड़ा करने का. अब वक़्त है नस्लीय न्याय को प्रभु की सभी संतानों के लिए वास्तविक बनाने का.

यह समय की जरुरत है इसकी अनदेखी करना राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध होगा. नेग्रोज़ के वैध असंतोष की चुभती गर्मी तब तक खत्म नहीं होगी जब तक स्वतंत्रता और समानता का ठंडा स्फूर्तिदायक मौसम नहीं आ जाता. उन्नीस सौ तिरेसठ एक अंत नहीं बल्कि एक शुरुआत है. और जो ये आशा रखते हैं कि नीग्रो अपना क्रोध दिखाकर फिर शांत हो जायेंगे, देश फिर पुराने ढर्रे पर चलने लगेगा मानो कुछ हुआ ही नहीं, उन्हें एक भयानक सुनामी का सामना करना पड़ेगा. अमेरिका में तब तक चिरशांति नहीं होगी जब तक नीग्रोज को नागरिकता का अधिकार नहीं मिल जाता है. विद्रोह का बवंडर तब तक हमारे देश की नींव हिलाता रहेगा जब तक न्याय का सुनहरा युग नहीं आ जाता.

लेकिन मैं अपने लोगों, जो न्याय के मन्दिर की देहलीज पर खड़े हैं, से जरूर  कुछ कहना चाहूँगा. अपना उचित स्थान पाने कि प्रक्रिया में हमें कोई गलत काम करने का दोषी नहीं बनना है. हमें अपनी आजादी की प्यास घृणा और कड़वाहट का प्याला पी कर नहीं बुझानी है.

हमें अपना संघर्ष हमेशा अनुशासन और मर्यादा में रहकर करना होगा. हमें कभी भी अपने रचनात्मक विरोध को शारीरिक हिंसा में नहीं बदलना है. हमें बारम्बार अपनी मर्यादा के उच्च स्तर को बनाये रखना है ताकि हम शारीरिक बल का सामना आत्म बल से कर सकें. आज नीग्रो  समुदाय, एक अजीब  उग्रवाद से घिरा हुआ है, हमें ऐसा कुछ नहीं करना है कि सभी श्वेत लोग  हम पर अविश्वास करने लगें, क्योंकि हमारे कई श्वेत बंधू  इस बात को जान चुके हैं की उनका भाग्य हमारे भाग्य से जुड़ा हुआ है, और ऐसा आज उनकी यहाँ पर उपस्थिति से प्रमाणित होता है. वो इस बात को जान चुके हैं कि उनकी स्वतंत्रता हमारी स्वतंत्रता से जुड़ी हुई है.

हम अकेले नहीं चल सकते.

और हम जैसे भी चलें, इस बात का प्रण करें कि हम हमेशा आगे ही बढ़ेंगे.

हम कभी वापस नहीं  मुड़ेंगे.

कुछ ऐसे लोग भी हैं जो, हम नागरिक अधिकारों के भक्तों से पूछ रहे हैं कि, “आखिर हम कब संतुष्ट होंगे?”

हम तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक, एक नीग्रो पुलिस की अकथनीय दहशत और बर्बरता का शिकार होता रहेगा. हम तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक, यात्रा की थकान से चूर हमारे शारीर, राजमार्गों के ढाबों और शहर के होटलों में विश्राम नहीं कर सकते. हम तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक, एक नीग्रो छोटी सी बस्ती से निकल कर एक बड़ी बस्ती में नहीं चला जाता. हम तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक, ”केवल गोरों के लिए” संकेत लगा कर, हमारे बच्चों के व्यक्तित्व को नीचा दिखाया जायेगा और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई जाएगी. हम तब तक संतुष्ट नहीं होंगे  जब तक, मिस्सीसिप्पी में रहने वाला नीग्रो मतदान  नहीं कर सकता और न्यूयॉर्क में रहने वाले नीग्रो को यकीन है कि उसके पास कोई विकल्प ही नहीं जिसके लिए वोट करे. नहीं, नहीं, हम संतुष्ट नहीं हैं और हम तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक, “न्याय जल की तरह और ईमानदारी एक तेज धारा की तरह प्रवाहित” नहीं होने लगते.

मैं इस बात से अनजान नहीं हूँ कि आप में से कुछ लोग बहुत सारे कष्ट सह कर यहाँ आये हैं. आपमें से कुछ तो अभी-अभी जेल की तंग काल-कोटरियों से निकल कर आये हैं. कुछ लोग ऐसी जगहों से आये हैं, जहां स्वतंत्रता की तलाश में आपको अत्याचार के थपेड़ों और पुलिस की बर्बरता से पस्त होना पड़ा है. आपको सही ढंग से कष्ट सहने का अनुभव है. इस विश्वास के साथ कि आपकी पीड़ा  का फल अवश्य मिलेगा आप अपना काम जारी रखिये.

मिस्सिस्सिप्पी वापस जाओ, अलबामा वापस जाओ, साउथ कैरोलिना वापस जाओ, जोर्जिया  वापस जाओ, लूसीआना वापस जाओ, उत्तरी शहरों की झोंपडपट्टियों और गंदी बस्तियों में वापस जाओ, ये जानते हुए कि किसी न किसी तरह इस स्थिति को बदलना पड़ेगा और बदलेगी. अब हमें निराशा की घाटी में वापस नहीं पड़ना है.

मैं आज आपसे कहता हूँ, मेरे दोस्तों, कि भले ही आज-कल हम परेशानियों का सामना कर रहे हैं, पर फिर भी मेरा एक सपना है (I have a dream), एक ऐसा सपना जो अमेरिका के सपने से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है.

मेरा एक सपना है कि एक दिन यह देश ऊपर उठेगा और सही मायने में अपने सिद्धांतों को पूरा करेगा. ”हम इस सत्य को स्वत: प्रमाणित मानते हैं कि : सभी पैदा हुए इंसान बराबर हैं”

मेरा एक सपना है कि एक दिन  जार्जिया के लाल पहाड़ों पर पूर्व गुलामों के बच्चे और पूर्व गुलाम मालिकों के बच्चे भाईचारे की मेज पर एक साथ बैठ सकेंगे.

मेरा एक सपना है कि एक दिन मिस्सिस्सिप्पी राज्य भी, जो अन्याय की आग में जल रहा है, अत्याचार की आग में जल रहा है, आजादी और न्याय के नखलिस्तान (oasis) में बदल जायेगा.

मेरा एक सपना है कि एक दिन मेरे चारों छोटे- छोटे बच्चे एक ऐसे देश में रहेंगे जहाँ उनका आंकलन उनकी चमड़ी के रंग से नहीं बल्कि उनके चरित्र  के बल पर किया जायेगा.

I HAVE A DREAM Martin Luther King Jr. (2)

आज मेरा एक सपना है !

मेरा एक सपना है कि एक दिन, अलबामा में, जहाँ क्रूर नस्लवादी हैं, वहाँ के गवर्नर के मुख से बीच-बचाव और कानून को निष्प्रभावी करने वाले शब्द निकलते हैं, एक दिन उसी अलबामा में, छोटे-छोटे अश्वेत लड़के-लड़कियां और छोटे-छोटे श्वेत लड़के-लड़कियों भाई-बहिन की तरह हाथ से हाथ मिलाकर साथ चलेंगे.

मेरा एक सपना है.

मेरा एक सपना है कि एक दिन हर एक घाटी ऊँची हो जाएगी, हर एक पहाड़ नीचे हो जायेगा, ऊबड़-खाबड़ स्थान सपाट हो जायेंगे, और टेढ़ी-मेढ़ी जगेहें सीधी हो जायेंगी; और तब इश्वर की महिमा प्रकट होगी और सभी मनुष्य उसे एक साथ देखेंगे.

यही हमारी आशा है, इसी विश्वास  के साथ मैं दक्षिण वापस जाऊंगा.

इसी विश्वास से हम, निराशा के पर्वत को चीरकर आशा का पत्थर निकाल पाएंगे. इसी विश्वास से हम, झगड़े की झनझनाहट को भाई-चारे की स्वरलहरी में बदल पाएंगे. इसी  विश्वास से हम, एक साथ काम कर पाएंगे, पूजा कर पाएंगे, संघर्ष कर पाएंगे, साथ जेल जा पाएंगे, स्वतंत्रता के लिए साथ-साथ खड़े हो पायेंगे, ये जानते हुए कि हम एक दिन मुक्त  हो जायेंगे.

ये एक ऐसा दिन होगा जब प्रभु की सभी संताने एक नए अर्थ के साथ गा सकेंगी :

“My country ’tis of thee’, sweet land of liberty, of thee I sing. Land where my fathers died, land of the pilgrim’s pride, from every mountainside, let freedom ring.” (मित्रों, ये अमेरिका का राष्ट्रगान है.)

और यदि अमेरिका को एक महान देश बनना है, इसे सत्य होना ही होगा.

और इसके लिए…  न्यू हैम्पशायर के विलक्षण हिलटॉपस् से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

न्यू यॉर्क के विशाल पर्वतों से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

पेंसिलवानिया की अल्घेनीज़ की ऊंचाईयों से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

बर्फ से ढकी कोलेराडो की चट्टानों से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

कैलिफोर्निया की घूमावदार ढलानों से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

केवल यहीं नहीं :

जार्जिया के स्टोन माउंटेन से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

टेनेसी के लुकआउट माउंटेन से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

मिस्स्सिस्सिप्पी के टिब्बों और पहाड़ियों से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

हर एक पर्वत से से आजादी की शहनाई बजनी चाहिये.

और जब ऐसा होगा, और जब हम आजादी की शहनाई बजने देंगे, जब हर एक गाँव और हर एक बस्ती से, हर एक राज्य और शहर से आजादी की शहनाई बजने लगेगी तब हम उस दिन को और जल्द ला सकेंगे जब इश्वर की सभी संतानें, श्वेत या अश्वेत, यहूदी या गैर- यहूदी (Gentiles), प्रोटेस्टेंट या कैथोलिक, सभी हाथ से हाथ मिलाकर नीग्रोज का आध्यात्मिक गाना गा सकेंगे :

“Free at last! free at last! Thank God Almighty, we are free at last!”

— मार्टिन लूथर किंग (Martin Luther King)

28, August, 1963; वाशिंगटन.

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मित्रों, परिणाम हमारे सामने है : आज बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं. (मेरी नजर मैं यह परिणाम मार्टिन लूथर किंग जैसे नेता की देन है.)

काश ! आजाद भारत को भी सच्ची सामाजिक समरसता स्थापित करनेवाला डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसा नेता मिलता. (यह मेरा निजी विचार है.)

यहाँ मैं आपके साथ एक और जानकारी शेयर करना चाहूँगा. मार्टिन लूथर किंग का I HAVE A DREAM” भाषण 16 मिनट का था. जिसमें पहले 10 तक का भाषण लिखित तैयार किया हुआ था, शेष 6 मिनट का भाषण विशाल जन समूह को देखते हुए अपने सन्देश को उनके दिलोदिमाग में और गहराई तक उतारने के लिये बिना किसी पूर्व तैयारी (ad libbed) के दिया था. मित्रों उल्लेखनीय (remarkable) बात यह है कि अविस्मरणीय (unforgettable) प्रख्यात लाइन (legendary line) I HAVE A DREAM” लिखित तैयार किये भाषण में थी ही नहीं !!

एक तथ्य और जोड़ना चाहूँगा …अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी तथा सोशियल लीडर डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर तीनों अमेरिका के महान लीडर थे. तीनों पक्के मानवतावादी थे. तीनों ने मानवाधिकारों के लिये प्राणों की बाजी लगा दी. तीनों की क्रमशः 15 अप्रेल 1865, 22 नवम्बर 1963 तथा 4 अप्रेल 1968 में हत्या की गयी थी.

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Note : Hindi translation में पूरी सावधानी रखने के बावजूद Mistake रह सकती है.

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