Motivational story उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये !!

∗उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये !!∗

– Motivational story –

Swami Vivekananda

Motivational story –

हम कोई भी प्राचीन मंदिर के बारे में गौर करें तो पायेंगे कि, ये सारे मंदिर सुन्दर और शांत स्थान पर बने हुए हैं. हर मंदिर के निर्माण में सुन्दर शिल्प कला के साथ उसकी मजबूती का पूरा ध्यान रखा गया है. संस्कृति की शुरुआत से ही ऋषि-मुनियों द्वारा , मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान की सेवा के लिये पुजारी की व्यवस्था की परम्परा स्थापित की गयी है; जो मंदिर की साफ़ सफाई के साथ आरती आराधना करता है. कुल मिलाकर मंदिर की मजबूती व हिफाजत साथ चाक-चौबंद (प्रलय तक का) प्रबंधन किया गया है (जैसा केदारनाथ के मंदिर में 2013 के जल प्रलय के समय देखा गया है.) ताकि भगवान वहां स्थायी रूप से निवास कर सके.

स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूँजी है, हर कोई जानता है; परन्तु क्यों जरुरी है? इस पर कम ही विचार करता है. अब मैं आपको अपने आप पर गौर करने का निवेदन करता हूँ. मनुष्य के शारीर में चेतन तत्व या जीव या आत्मा या जो भी संज्ञा दें, वो; मन्दिर में प्रतिष्ठित भगवान (मूर्तीरुपी) का रूप है. हमें इन्द्रियां व अंग यथा आंख, कान, नाक, त्वचा, जिह्वा (जीभ), हाथ, पैर आदि (पुजारी) दिए है, ताकि मंदिर रुपी शरीर की सेवा व आत्मा की आराधना करे; ताकि शारीर सुदृढ, सुडोल व सुन्दर रहे, जिसमें आत्मा स्थायी रूप से शांतिपूर्वक निवास कर सके. आप शारीर को अन्दर व बाहर से साफ सुथरा व मजबूत रखेंगे उतनी देर उसमें विशुद्ध आत्मा निवास करेगी. और आपकी सफलता के चर्मोत्कर्ष की उतनी ही अधिक प्रबल संभावना बनेगी !

इन्ही तथ्यों का स्पष्ट करती एक छोटी सी A Motivational story पेश है :

एक शहर में एक अमीर व्यक्ति रहता था. वह पैसे से तो बहुत धनी था लेकिन शरीर और सेहत से बहुत ही गरीब. दरअसल वह हमेशा पैसा कमाने की सोचता रहता, दिन रात पैसा कमाने के लिए मेहनत करता लेकिन अपने शरीर के लिए उसके पास बिल्कुल समय नहीं था. फलस्वरूप अमीर होने के वाबजूद उसे कई प्रकार की बिमारियों ने घेर लिया और शरीर भी धीरे धीरे कमजोर होता जा रहा था, लेकिन वह इस सब पर ध्यान नहीं देता और हमेशा पैसे कमाने में लगा रहता.

एक दिन वह थका हारा शाम को घर लौटा और जाकर सीधा बिस्तर में लेट गया. धर्मपत्नी जी ने खाना लगाया लेकिन अत्यधिक थके होने के कारण उसने खाना खाने से मना कर दिया और भूखा ही सो गया. आधी रात को उसके शरीर में बहुत तेज दर्द हुआ, वह कुछ समझ नहीं पाया कि ये क्या हो रहा है. अचानक उसके सामने एक विचित्र सी आकृति आकर खड़ी हो गयी और बोली – हे मानव मैं तुम्हारी आत्मा हूँ और आज मैं ये तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ.

वह व्यक्ति घबराया सा बोला – आप मेरा शरीर छोड़ कर क्यों जाना चाहती हो मैंने इतनी मेहनत से इतना पैसा और वैभव कमाया है, इतना आलिशान बंगला बनवाया है यहाँ तुम्हें रहने में क्या दिक्कत है. आत्मा बोली – हे मानव सुनो मेरा घर ये आलिशान बंगला नहीं तुम्हारा शरीर है जो बहुत दुर्बल हो गया है जिसे अनेकों बिमारियों ने घेर लिया है. सोचो अगर तुम्हें बंगले की बजाए किसी टूटी झोपड़ी में रहना पड़े तो कितना दुःख होगा उसकी प्रकार तुमने अपने शरीर यानि मेरे घर को भी टुटा फूटा और खण्डर बना लिया है जिसमें मैं नहीं रह सकती.

मित्रों ! उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये !!

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