दीपावली | Deepavali Hindi Essay

∗दीपावली∗

Deepavali at Amritsar

अमृतसर में दुनिया की सबसे शानदार दिवाली

“तमसो मा ज्योतिर्गमय. अर्थात अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर गमन.” – दीपावली सन्देश.

— प्रकाश का पर्व दीपावली —

Deepavali Diwali

Deepavali Hindi Essay –

दीपावली हिन्दुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार है. दीपावली कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है. इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे. उनके लौटने कि खुशी में अयोध्या के लोगो ने श्री राम के स्वागत में घरों को सजाकर, घी के दीप कतार में जलाकर पूरी नगरी को रोशन कर दिया था. तब से ही इस दिन को दीपावली के रूप में मानते हैं. दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति. दीपावली शब्द ‘दीप’ एवं ‘आवली’ की संधि से बना है. आवली अर्थात पंक्ति. इस प्रकार दीपावली शब्द का अर्थ है, दीपों की पंक्ति.

त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र श्री राम ने अपने पिता का वचन पूरा के लिए अपनी पत्नी सीता जी एवं अनुज लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष वनवास में रहे थे. वनवास के दौरान लंका का राजा रावण सीता जी का अपहरण करके उन्हें लंका ले के चला गया था. तब श्री राम ने हनुमान, अंगद, सुग्रीव, जामवंत आदि के साथ विशाल वानर सेना के सहयोग से समुद्र पर सेतु निर्माण कर, लंका पर चढ़ाई की और रावण जैसे आततायी का वध कर धर्म की स्थापना की. इससे सम्पूर्ण मानव जाति को यह संदेश गया कि बुराई पर अच्छाई की सदा जीत होती है. इस विजय की स्मृति में दशहरा तथा इसके बीस दिन बाद अयोध्या पहुँचने की ख़ुशी में दीपावली मानते है. दीपावली एक दिन का पर्व नहीं अपितु पर्वों का समूह है.

दीपावली : पर्वों का समूह :

दशहरे के पश्चात ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती है. लोग नए-नए वस्त्र सिलवाते हैं. दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्यौहार आता है. इस दिन बाज़ारों में चारों तरफ़ जनसमूह उमड़ पड़ता है. बरतनों की दुकानों पर विशेष साज-सज्जा व भीड़ दिखाई देती है. धनतेरस के दिन बरतन खरीदना शुभ माना जाता है. इस दिन घर के द्वार पर एक दीपक जलाया जाता है. इससे अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली होती है. इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं. अगले दिन दीपावली आती है. इस दिन घरों में सुबह से ही तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं. बाज़ारों में खील-बताशे, मिठाइयाँ, खांड़ के खिलौने, लक्ष्मी-गणेश आदि की मूर्तियाँ बिकने लगती हैं. स्थान-स्थान पर आतिशबाजी और पटाखों की दूकानें सजी होती हैं. दीपावली की शाम लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है. पूजा के बाद लोग अपने-अपने घरों के बाहर दीपक व मोमबत्तियाँ जलाकर रखते हैं. चारों ओर चमकते दीपक अत्यंत सुंदर दिखाई देते हैं. रंग-बिरंगे बिजली के बल्बों से बाज़ार व गलियाँ जगमगा उठते हैं. बच्चे तरह-तरह के पटाखों व आतिशबाज़ियों का आनंद लेते हैं. रंग-बिरंगी फुलझड़ियाँ, आतिशबाज़ियाँ व अनारों के जलने का आनंद प्रत्येक आयु के लोग लेते हैं. देर रात तक कार्तिक की अँधेरी रात पूर्णिमा से भी से भी अधिक प्रकाशयुक्त दिखाई पड़ती है. दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. इस दिन लोग अपने गाय-बैलों को सजाते हैं तथा गोबर का पर्वत बनाकर पूजा करते हैं. दीपावली के दूसरे दिन भाई दूज का पर्व होता है. दीपावली के दूसरे दिन व्यापारी अपने पुराने बहीखाते बदल देते हैं. वे दूकानों पर लक्ष्मी पूजन करते हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने से धन की देवी लक्ष्मी की उन पर विशेष अनुकंपा रहेगी. कृषक वर्ग के लिये इस पर्व का विशेष महत्त्व है. खरीफ़ की फसल पक कर तैयार हो जाने से कृषकों के खलिहान समृद्ध हो जाते हैं. कृषक समाज अपनी समृद्धि का यह पर्व उल्लासपूर्वक मनाता हैं.

दीपावली के पर्वों समूह होने का कारण इसके अनेक योगायोग हैं.

दीपावली के साथ योगायोग :

राम भक्तों के अनुसार दीवाली वाले दिन अयोध्या के राजा राम लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे. उनके लौटने कि खुशी मे आज भी लोग यह पर्व मनाते है. कृष्ण भक्तिधारा के लोगों का मत है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी राजा नरकासुर का वध किया था. इस नृशंस राक्षस के वध से जनता में अपार हर्ष फैल गया और प्रसन्नता से भरे लोगों ने घी के दीए जलाए. एक पौराणिक कथा के अनुसार विष्णु ने नरसिंह रुप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था. तथा इसी दिन समुद्रमंथन के पश्चात लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए. जैन मतावलंबियों के अनुसार चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी दीपावली को ही है. सिक्खों के लिए भी दीवाली महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन ही अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था. और इसके अलावा 1619 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह को जेल से रिहा किया गया था. नेपालियों के लिए यह त्योहार इसलिए महान है क्योंकि इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष शुरू होता है.

कुछ और संयोग हैं. पंजाब में जन्मे स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दोनों दीपावली के दिन ही हुआ. इन्होंने दीपावली के दिन गंगातट पर स्नान करते समय ‘ओम’ कहते हुए समाधि ले ली. भारतीय संस्कृति के महान जननायक एवं आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द ने दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया. मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊँचे बाँस पर एक बड़ा आकाशदीप दीपावली के दिन लटकाया जाता था.

दपावली के साथ अनेकानेक योगायोग तथा भारातीय विविधताओं व मान्यताओं के कराण अलग अलग प्रदेशों में दिवाली मानाने के कमोबेश भिन्नता पायी जाती है.

भारत के विभिन्न प्रदेशों की दीपावली :

अमृतसर की दिवाली – दुनिया की सबसे शानदार दिवाली पंजाब के अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर में मनाई जाती है. यहां गुरुद्वारे को ऐसे सजाया जाता है, जैसे कि आकाश के तारे जमीन पर उतर आए हैं. यहां पर भी उत्तर के अन्य राज्यों की तरह ही लक्ष्मी पूजा व आतिशबाजी के साथ दीपावली का त्योहार मनाया जाता है.

उत्तर भारत में दिवाली – श्रीराम रावण का वध करके लक्ष्मण व सीता सहित कार्तिक अमावस्या को अयोध्या लौटे थे. उस दिन दीपक और आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया गया. तब से दिवाली का त्यौहार इतनी धूम-धाम से मनाया जाता है. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि प्रदेशों में माता लक्ष्मी की पूजा के साथ ही रातभर दीपक व आतिशबाजी से अंधकारमयी रात को प्रकाशमय बनाकर दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है. भगवान राम और कृष्ण के मंदिरों में भी बड़े स्तर पर दिवाली का उत्सव मनाया जाता है.

दक्षिण भारत में दिवाली – दक्षिण भारत के तमिलनाडु में थुलम के महीने में मनाया जाता है. यहां दिवाली के एक दिन पहले यानी नरक चतुर्दशी के दिन मनाया जाने वाला उत्सव दक्षिणी भारत के दिवाली उत्सव का सबसे प्रमुख दिन होता है. इसके लिए एक दिन विशेष स्नान की तैयारी की जाती है, अगले दिन सुबह पारंपरिक तरीके से तेल स्नान किया जाता है. सुबह सभी अपने घर का आंगन साफ कर व धो कर रंगोली बनाते हैं. दक्षिण में दिवाली से जुड़ा सबसे अनोखा रिवाज़ है जिसे थलाई दिवाली कहा जाता है. इस रिवाज़ के अनुसार नवविवाहित जोड़े को दिवाली मनाने के लिए लड़की के घर जाना होता है. जहां उनका स्वागत किया जाता है. उसके बाद नवविवाहित जोड़ा घर के बड़े लोगों का आशीर्वाद लेता है. फिर वे दिवाली के शकुन का एक पटाखा जलाते हैं और दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं. दोनों के परिवार वाले जोड़े को अनेक तरह के गिफ्ट देते हैं.

हरियाणा में दिवाली – हरियाणा के गांवों में लोग दीपावली कुछ अलग ही ढंग से मनाते हैं. इस त्योहार से कुछ दिन पहले लोग अपने घरों में पुताई करवाते हैं. घर की दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाई जाती है तथा पास में घर के हर सदस्य का नाम लिखा जाता है. उसके बाद पूरे आंगन में मोमबत्तियों और दीयों से सजाया जाता है. फिर उसके आगे खील-बताशे व खिलौना रखे जाते हैं व उनके ऊपर घी डाला जाता है. उसके बाद उन्हें जलाया जाता है. हर घर से चार दीपक चौराहे पर रखे जाते हैं, जिसे टोना कहते हैं.

पश्चिम बंगाल की दिवाली – पश्चिम बंगाल में दिवाली का त्योहार बहुत उत्साह व उमंग से मनाया जाता है. इसकी तैयारी 15 दिन पहले से शुरू कर दी जाती है. घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है. दिवाली की मध्यरात्रि में लोग महाकाली की पूजा अर्चना करते हैं.

महाराष्ट्र की दिवाली – महाराष्ट्र में दिवाली का कार्यक्रम चार दिनों का होता है. पहला दिन वसु बरस कहा जाता है. इस दिन आरती गाते हुए गाए और बछड़े का पूजन किया जाता है. धनतेरस के दिन को महाराष्ट्र में व्यापारियों के बहीखाता पूजन के लिए विशेष माना जाता है. उसके अगले दिन नरक चतुर्दर्शी पर सूर्योदय से पहले उबटन कर स्नान करने की परंपरा है. स्नान के बाद पूरा परिवार मंदिर जाता है. चौथे दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. साथ ही, करंजी, चकली, लड्डू, सेव आदि पारंपरिक व्यजन का लुत्फ उठाया जाता है.

पूर्वी राज्यों की दिवाली – असम, मणिपुर व त्रिपुरा आदि पूर्वी राज्यों में काली पूजा की जाती है. दीपावली की मध्य रात्रि तंत्र साधना के लिए सबसे उपर्युक्त मानी जाती है. इसलिए तंत्र को मानने वाले इस दिन कई तरह की साधनाएं करते हैं.

अन्य राज्यों में दिवाली – मध्यप्रदेश, मेघालय, झारखंड आदि आदिवासी बहुल क्षेत्र है. यहां दीपदान किए जाने का रिवाज है. इस अवसर पर आदिवासी स्त्री व पुरुष नृत्य करते हैं. यहां धनतेरस के दिन से यमराज के नाम का भी एक दीया लगाया जाता है. यह दीप घर के मुख्य द्वार पर लगाया जाता है, ताकि घर में मृत्यु का प्रवेश न हो.

दीपदान

दीपदान

निष्कर्ष के रूप कहा जा सकता है कि दीपावली के पर्वों को धूमधाम से मानाने की परम्परा चली आ रही है. घर में सब नए कपड़े पहनते हैं. घरों को बढ़िया सजाया जाता है. घर के अन्दर – बाहर दीयों से रोशनी की जाती है. सभी पटाखों का आनन्द लेते हैं. और ये सब अच्छा लगता हैं. साथ ही आदर्शों को याद करने और उनके गुणों को अपनाने का अच्छा अवसर होता है. दीपावली अमन, शांति व भाईचारे से रहने का, अहंकार त्यागकर निर्मल मन से रहने का, दुर्गुण छोड़कर अच्छे गुण अपनाने का अवसर देती है.

Friends,

This Inspirational Deepavali Hindi Essay, I have received from Smt Kamlesh Choudhary, Barmer (Rajasthan). Thanks a lot Smt Kamlesh Choudhary.

विजय का पर्व दशहरा Dussehra Hindi Essay 1

हमें अपने आदर्शों के त्याग, तप व संघर्ष को भी नहीं भूलना चाहिए. उन्होंने साबित कर दिया हमेशा बुराई पर अच्छाई की, पाप पर पुन्य की जीत निश्चित है. हर युग में नये रावण पैदा होते रहते हैं. अब आतंकवाद के रावण से पूरी दुनिया त्रस्त है. यह रक्त राक्षस से भी ज्यादा ख़राब है. रक्त राक्षस का वध करने पर जहाँ खून गिरता वहीँ नया राक्षस तैयार हो जाता था, परन्तु आतंकवाद के राक्षस remote से भी तैयार हो रहे हैं. इस दिवाली पर आतंकवाद के रावण को मारने की बात आगे बढ़ायें. इस रावण का भी मरना तय है. तैयारी करनी है तो बस विश्व जनमत की !!

दिवाली पर अपना व अपने साथियों का ख्याल रखें. आप सबको दिवाली की बहुत-बहुत शुभकम्नायें. Happy Diwali. Thanks.

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दीपावली शुभकामना सन्देश !!

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