“वीणावादिनी” | Sarsvati Vandna

∗वर दे, वीणावादिनि वर दे !∗

– Sarsvati Vandna –

वीणावादिनी Sarswati

“वीणावादिनी”

(सरस्वती वंदना)

1.

वर दे, वीणावादिनि वर दे !

प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव

                   भारत में भर दे !

 2.

काट अंध-उर के बंधन-स्तर

बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;

कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर

                जगमग जग कर दे !

3. 

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव

नवल कंठ, नव जलद-मन्द्र रव;

नव नभ के नव विहग-वृंद को

             नव पर, नव स्वर दे !

 

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

 Suryakant Tripathi Nirala

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

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