अपना जीवन डिजाईन करें | Design Own Life in Hindi

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– Design Own Life –

Bronnie Ware(Bronnie Ware)

“हैरानी की बात यह है कि किसी पेशेन्ट ने यह नहीं कहा कि मेरे जीवन में कोई मंनोरजन या सेक्स या खेलने-कूदने की कमी रही है.”

— ब्रोनी वेयर (Bronnie Ware)

Design Own Life –

हम सब इस सार्वभौम सत्य (Universal truth)को जानते हैं कि, मरता हुआ व्यक्ति हमेशा सत्य बोलता है. उसकी कही एक-एक बात देववाणी (Epiphany) के तुल्य होती है. ऑस्ट्रेलिया की ब्रोनी वेयर (Bronnie Ware) ने ऐसे ही मृत्यु से जूझ रहे लाईलाज बिमारियों व असहनीय दर्द से पीड़ित लोगों (Patients) की सेवा (Palliative care) में कई वर्ष एक उपशामक नर्स (Palliative Nurse) की तरह कार्य किया. ब्रोनी वेयर ने इस अवधि में एक बहुत ही सार्थक व रोचक सर्वेक्षण किया. जिसके निष्कर्ष हमारी आँखें खोल देने वाले हैं!

ब्रोनी वेयर (Broni Ware) ने मौत से जूझ रहे मरीजों की कई वर्ष तक देखभाल (Palliative care) की. उसने कई ऐसे मरीजों की सेवा की जिनका जीवन अंतिम 12 सप्ताह में था. ब्रोनी वेयर ने अपने पेशेंट्स पूछा कि आज आपकी जिन्दगी अन्तिम दिनों में है तो आपको अपने जीवन में सबसे बड़ा पछतावा किस बात क्या रहेगा? उसने उनके द्वारा बतायी गयी बातों (Epiphanies) को अपने ब्लोग पर रिकॉर्ड किया. पूरे सर्वे में उसने पांच शीर्ष (Top) रिग्रेटस् (तछतावों) की सूचीबद्ध किया. मरीजों की बातों ने उसका इतना ध्यान आकर्षित किया कि उसने अपने Observations की एक किताब “Top five regrets of the dying” तैयार कर दी. यह बुक विश्व की बेस्ट सेलिंग बुक साबित हुई. पूरी के दुनिया लोग ने इससे प्रेरित होकर अपने जीवन को जीने की कला सीखी है. अब तक यह बुक 27 भाषाओँ में छप चुकी है.

ब्रोनी वेयर द्वारा मृत्यु से जूझ रहे लोगों (Patients) के रिकॉर्ड किये गए पछतावों में ज्यादातर आम अफ़सोस (Common Regrets) थे. ब्रोनी ने Patients के Observations में यह पत्ता लगाया कि सबसे ज्यादा Common Regrets क्या है तो उन रेग्रट्स में सबसे ज्यादा Patients ने बताया गया कि, “मेरी इच्छानुसार, मैंने उतनी कड़ी मेहनत नहीं की.’’

हैरानी की बात यह है कि किसी पेशेन्ट ने यह नहीं कहा कि मेरे जीवन में कोई मंनोरजन या सेक्स या खेलने-कूदने कमी की रही है. वेयर ने ऐसे लोगों से बात चीत की जिनके जीवन के मात्र कुछ दिन बचे थे. उन्होंने बहुत ही आम रिग्रेटरस् बताये थे. शीर्ष रिग्रेटरस् में पुरूषों में सबसे ज्यादा पछतावा था “मेरी इच्छानुसार मैंने उतनी कड़ी मेहनत नहीं की.”

वेयर ने लिखा है कि लोगों का जिन्दगी के अन्तिम पड़ाव में दृष्टिकोण (Vision) अभूतपूर्व रूप से स्पष्ट था, जिससे हम बहुत सीख सकते हैं. जब उनसे प्रश्न किया गया कि ’’क्या उन्हें कोई पछतावा हैं या कुछ अलग कर सकते थे’’ सामान्यतः वह बताती है कि ‘‘लोगों से बार-बार एक जैसे मुद्दे उभर कर सामने आये.”  वेयर ने सबसे बड़े पांच रिग्रेटरस् नोट किये :

: सबसे बड़े पाँच डाईंग रिग्रेटरस् :

(Top five regrets of the dying in Hindi)

1. मेरी इच्छानुसार (काश मैं), दूसरों की अपेक्षा अनुसार जीवन न जीकर मैं स्वयम् के प्रति ईमानदारी से जीवन जीने की हिम्मत जुटा पाता.

यह सबसे ज्यादा आम (Common) रिग्रेट था. जब लोग मेहसूस करते हैं उनका जीवन लगभग समाप्त हो गया है, वे पीछे स्पष्ट देखते हैं कि उनके बहुत सारे सपने अधूरे रह गये. अधिकतर लोगों ने अपने आधे सपनों को भी पूरा नहीं किया था. उनको यह जानते हुए मरना पड़ा कि यह सब उनके ही कारण हुआ. बहुत कम लोगों को एहसास है कि स्वास्थ्य ही आजादी से जीने की राह देता है. और जब तक एहसास होता है, तब तक स्वास्थ्य उनके हाथ से निकल जाता है.

2. (काश मैं) मेरी इच्छानुसार, मैं अपनी भावनाओं की अभिव्यक्त करने साहस जुटा पाता.

ब्रोनी वेयर ने पाया कि बहुत सारे लेागों ने अपनी भावनाओं को इसलिये दबाया कि शांति बनी रहें, परिणाम स्वरूप उनको औसत दर्जे का जीवन जीना पड़ा और वे अपनी वासतविक योग्यता के हकदार नहीं बन सके. इसी बात की कड़वाहट और असंतोष के कारण उनको कई बिमारियां हो गयी थी.

3. मेरी इच्छानुसार, मैंने उतनी कड़ी मेहनत नहीं की.

बोर्नी वेयर ने बताया कि, ‘‘मैंने जितने भी पुरूष Patients का उपचार किया प्रत्येक को यह Regret था. उन्होंने अपने युवा बच्चों व जीवन साथी के साहचर्य में हुई चूक को याद किया. औंरतों ने भी यह रिग्रेट बताया, परन्तु उन में से अधिकतर पुरानी पीढ़ी की थी, ज्यादातर महिला Patients के पास जिविकोपार्जन के साधन नहीं थे. पुरूषों को बहुत ही गहरा पछतावा था कि उन्होंने अपना अधिकतर जीवन अपने कार्य स्थल पर खर्च कर दिया था. उन में से हरेक ने कहा कि, “मैं कड़ी मेहनत करके उनके लिये समय निकाल सकता था.”

4. (काश) मेरी इच्छानुसार, मैं मेरे मित्रों के साथ संपर्क में रहता.

ब्रोनी ने सर्वेक्षण में बताया कि ‘‘अक्सर लोगों को मृत्यु नजदीक पहुंचने तक पुराने मित्रों के पूरे फायदों का वास्तिक एहसास ही नहीं हुआ था. अधिकतर तो अपनी जिन्दगी में इतने उलझ गये थे कि, उनकी स्वर्णिम मित्रता कई वर्षों से उनके हाथ से निकल गयी थी. उनके द्वारा दोस्ती के लिये अपेक्षित समय और जोर नहीं देने के कारण बहुत गहरे अफसोस थे. हर कोई मरते वक्त अपने दोस्तों को याद कर रहा था.

5. (काश) मेरी ईच्छानुसार मैं अपने आप को खुश रखता.

यह एक आश्चर्य की बात आम है, कई लोगों को जीवन के अन्त तक यह पता नहीं लगता है कि ख़ुशी भी एक choice है. लोग अपने पुराने तौर-तरीकों व आदतों से चिपके रहते है. वे अपने परिजनों व परिचितों के तथाकथित सम्मान (लिहाज) के चक्कर में अपनी भावनाओं के साथ भौतिक जीवन को भी स्वाह कर देते है परिवर्तन के डर से वे दुसरों व अपने खुद के लिये नाटक करते हैं कि, वे संतुष्ट है. जब एकदम अकेले होते तब ढंग से हंसते, और वापस मूर्खता की चादर ओढ लेते.

मित्रों, ये पूरे जीवन के निचोड़ से निकाला गया सार है. हम सब अपने जीवन को नये सिरे से डिजाइन कर सकते हैं. हर अफ़सोस से छुटकारा पा सकते हैं. अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं. अब आप जीवन की कला तय कर सकते हैं. अपना जीवन डिजाईन करें … Design Own Life !

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