Hard work को Smart work में बदलें

∗Hard work को Smart work में बदलें∗

 

Hard work को Smart work में बदलें – 

Hard work को Smart work में बदलें – आज के जमाने में मात्र Hard work ही पर्याप्त नहीं है. सफलता को सुनिश्चित करने के लिए Smart work जरुरी हो गया है. Hard work, Smart work को सहज रूप से समझने के लिए नीचे दी गई कहानियों को नि:संदेह रूप ये वर्षों-वर्ष से पढ़ी और दोहराई जाती रही है. इसलिए हम इस विशवास के साथ इन कहानियोँ पढ़ें कि, इनसे नए Ideas के बारे में सोचने की शुरुवात होगी. ये दो प्रेरणादायक कहानियां पढ़ें और बार-बार पढकर बारीक विश्लेषण जरुर करें.

Hard work को Smart work में बदलें – पहली कहानी

एक बार की बात है, शंकर और गणेश दो घनिष्ठ मित्र थे. दोनों एक व्यापारी के यहाँ लकड़ी काटने का काम करते थे. दोनों दिन भर मेहनत करते और लकड़ी काटते थे. शंकर हमेशा गणेश से अधिक लकड़ी काटा करता था. उसकी तनख़्वा की गणेश से ज़्यादा थी. ये बात गणेश को बहुत अखरती थी कि, “मैं भी दिन भर मेहनत करता हूँ फिर भी कम लकड़ी काट पता हूँ और तनख़्वा भी कम मिलती है.”

एक दिन गणेश से रहा नहीं गया आख़िर उसने व्यापारी से पूछ ही लिया कि, “शंकर में ऐसी क्या बात है कि आप उसको मुझसे ज़्यादा मेहनताना देते हो और मुझसे ज़्यादा विश्वास भी करते हो?” व्यापारी ने हँस कर जवाब दिया कि, “मैं देखता हूँ की तुम रोज सुबह आते हो लकड़ी काटने मे लग जाते हो और शाम तक कुछ लकड़ियाँ काट कर वापस चले जाते हो फिर अगले दिन वही करते हो. लेकिन शंकर सुबह आकर सबसे पहले अपनी लकड़ी काटने की कुल्हाड़ी को धार देता है फिर सारा दिन वो बिना ज़्यादा मेहनत किए तुमसे ज़्यादा लकड़ी काट लेता है. यही अंतर है तुम दोनों में और मैं इसीलिए शंकर को ज़्यादा पैसा भी देता हूँ.”

Hard work को Smart work में बदलें – दूसरी कहानी

एक समय की बात है, एक गरीब मजदूर था. वह हर रोज कड़ी मेहनत करके पास में ही स्थित पहाड़ी से पत्थर तोड़ता और बाजार में जाकर उसे बेच देता था. जिससे उसका रोज का घर खर्च मुश्किल से चलता पता था.

एक दिन वह पत्थर बेचने एक कारीगर की दुकान पर गया तो उसने देखा कि कारीगर बहुत सुन्दर पत्थर व्यापारी को हजारों रूपये में बेच रहा था. उसने कारीगर को पूछा कि यह इतने कीमती पत्थर कहाँ मिलते है. कारीगर ने कहा कि यह वही पत्थर है जो तुमने मुझे बेचा था, मैंने तुम्हारे पत्थर के छोटे छोटे टुकड़े करके इनको अपनी कारीगरी से सुन्दर बनाया है.

कारीगर की बात सुनकर मजदूर बड़ा दुखी हुआ. और उसने कहा – “दुनिया में मेहनत की कोई कीमत ही नहीं. मैं रोज 12 घंटे कड़ी धूप में मेहनत करके पत्थर तोड़कर लाता हूँ लेकिन मुझे 100-200 रूपये मुश्किल से मिलते हैं और तुम छ:-सात घंटे आराम से बैठकर काम करते हो फिर भी तुम्हारी आमदनी मुझसे सौ गुना अधिक हैं.”

कारीगर ने कहा – “किसी वस्तु का मूल्य इस बात से निर्धारित नहीं होता कि वह कितनी मेहनत करके बनाई गयी है, उसका मूल्य इस बात से निर्धारित होता है कि उसकी उपयोगिता क्या है या वह कितनी उपयोगी है.”

मित्रों, पहली कहानी में शंकर ने Work के साथ तकनीकी (Technology) का इस्तेमाल किया है जिससे उसके काम की गति बढ़ गयी. दूसरी कहानी में कारीगर ने Work के साथ रचनात्मकता (Creativity) का उपयोग किया है, जिससे पत्थर का मूल्य बढ़ गया. दोनों ही Samart Work हैं. दोनों ही कहानियों का सार यह है बुद्धि (Intelligence) का का उपयोग करके अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं. बुद्धि के प्रयोग से नए Ideas को dovelop कर Hard Work को Samart Work में बदल सकते हैं. सफलता का भी यही पैमाना है. अर्थात

Hard Work + Intelligence (Use of Creativity and Technology) = Smart Work

Hard work Smart work in Hindi 3

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