अब तो, ये सूरत बदलनी चाहिए …

∗ये सूरत बदलनी चाहिए …∗

ये सूरत बदलनी चाहिए

पाकिस्तान में सर्जीकल स्ट्राइक, भारत में भ्रष्टाचार के के विरुद्ध नोट बेन स्ट्राइक और अब ऑनलाइन कैशलेस ट्रांजेक्शन (online cashless transaction) की बात चल रही है. ये सब हर मोर्चे पर हालात को सुधारने के लिए किये जा रहे प्रयास हैं. मित्रों, 01.03.2015 को Online Money making Ideas – [Pack-2] in Hindi पोस्ट के अन्त मैंने आप सबसे निवेदन किया था कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करने का एक मात्र तरीका ऑनलाइन आना है. अब धीरे धीरे ही सही, चीजें आगे बढ़ रही है. आज भी यही कहूँगा कि गरीबी, भ्रष्टाचार, और आतंकवाद पर नियंत्रण लिए सबको ऑनलाइन आना चाहिये. काफी दिनों से दुष्यंत कुमार की एक कविता मेरे दिमाग में घूम रही है. आज आपके साथ शेयर कर रहा हूँ. अब तो, ये सूरत बदलनी चाहिए …

ये सूरत बदलनी चाहिए …

1.

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

2.

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

3.

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

4.

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

5.

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

6.

सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

अब तो यह सूरत बदलनी ही चाहिये …

— दुष्यंत कुमार —

Dushyant kumar ये सूरत बदलनी चाहिए

 

दुष्यन्त कुमार की जीवनी

नाम दुष्यन्त कुमार त्यागी / Dushyant Kumar Tyagi
जन्म 1 सितम्बर, 1933.
जन्म स्थान राजपुर-नवादा, जिला बिजनौर (उ.प्र.).
मृत्यु 30 दिसम्बर, 1975.
मृत्यु स्थान भोपाल (म.प्र.).
राष्ट्रीयता भारतीय.
धर्म हिन्दू.
शिक्षा एम.ए. (हिन्दी), इलाहाबाद.
व्यवसाय हिन्दी कवि और ग़ज़लकार.
उल्लेखानीय तथ्य
  • परतंत्रता की जकड़न से उन्मुक्ति की छटपटाहट के दौरान काव्य, दर्शन, चिंतन और विचार-प्रवाह, सभी पक्ष क्रांति के वाहक थे.
  • निदा फ़ाज़ली उनके बारे में कहते हैं : “दुष्यंत की नज़र उनके युग की नई पीढ़ी के ग़ुस्से और नाराज़गी से सजी बनी है. यह ग़ुस्सा और नाराज़गी उस अन्याय और राजनीति के कुकर्मो के ख़िलाफ़ नए तेवरों की आवाज़ थी, जो समाज में मध्यवर्गीय झूठेपन की जगह पिछड़े वर्ग की मेहनत और दया की नुमानंदगी करती है.”
उल्लेखानीय कार्य कविता-संग्रह : सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे, जलते हुए वन का वसन्त, साये में धूप. उपन्यास : छोटे-छोटे सवाल, दुहरी जिन्दगी, आँगन में एक वृक्ष. नाटक : मसीहा मर गया. एकांकी : मन के कोण. नाट्य काव्य : एक कण्ठ विषपायी.

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