Guru Nanak Dev Quotes in Hindi गुरु नानक देव के अनमोल विचार

∗गुरु नानक देव के अनमोल विचार∗

  • – Guru Nanak Dev Quotes –

guru nanak dev 2

(Guru Nanak Gurpurab – 14 November 2016, 04 November 2017)

“Nanak naam jahaz hai, Chadhe so utre paar.”

नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार।

जो शरधा कर सेव दे, गुर पार उतारन हार॥

Quote 1. : Your Mercy is my social status.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : आपकी सद्भावना ही मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा है.

— गुरु नानक देव

Quote 2. : Dwell in peace in the home of your own being, and the Messenger of Death will not be able to touch you.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : अपने घर में शांति से निवास करने वालों का यमदूत भी बाल बांका नहीं कर सकता.

— गुरु नानक देव

Quote 3. : From His (God) brilliancy everything is illuminated.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : उसके (भगवान) तेज से ही सब कुछ प्रकाशित है.

— गुरु नानक देव

Quote 4. : Let no man in the world live in delusion. Without a Guru none can cross over to the other shore.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : दुनिया में किसी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिये. बिना गुरु कोई भी दुसरे किनारे को पार नहीं कर सकता.

— गुरु नानक देव

Quote 5. : I am neither a child, a young man, nor an ancient; nor am I of any caste.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : मैं न तो बच्चा, न जवान, और न ही पुराना हूँ; न ही मैं किसी भी जाति का हूँ.

— गुरु नानक देव

Quote 6. : Even Kings and emperors with heaps of wealth and vast dominion cannot compare with an ant filled with the love of God.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : कुबेर धन कोष से युक्त विशाल साम्राज्य के सम्राट व राजा भी भगवान के प्रेम में सराबोर चिंटी की बराबरी नहीं कर सकते.

— गुरु नानक देव

Quote 7. : He who regards all men as equals is religious.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : धार्मिक वही है जो सभी लोगों का समान रूप से सम्मान करे.

— गुरु नानक देव

Quote 8. : Speak only that which will bring you honor.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : केवल वही बोलो जो आपको सम्मान दिलाये.

— गुरु नानक देव

Quote 9. : Owing to ignorance of the rope the rope appears to be a snake; owing to ignorance of the Self the transient state arises of the individualized, limited, phenomenal aspect of the Self.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : रस्सी की अज्ञानता के कारण रस्सी सांप प्रतीत होता है; स्वयं की अज्ञानता के कारण क्षणिक स्थिति भी स्वयं का व्यक्तिगत, सीमित, अभूतपूर्व स्वरूप प्रतीत होती है.

— गुरु नानक देव

Quote 10. : One cannot comprehend Him through reason, even if one reasoned for ages.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : कोई भी उसको तर्क से नहीं समझ सकता, चाहे वह तर्क करने में कई जीवन लगा दे.

— गुरु नानक देव

Quote 11. : Death would not be called bad, O people, if one knew how to truly die.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : प्रियजनों! मौत भी बुरी नहीं कहलायेगी, यदि व्यक्ति जनता हो कि सही मायने में कैसे मरते हैं.

— गुरु नानक देव

Quote 12. : Whatever kind of seed is sown in a field, prepared in due season, a plant of that same kind, marked with the peculiar qualities of the seed, springs up in it.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : बीज चाहे किसी भी प्रजाति का हो, उपयुक्त मौसम में तैयार की हुई जमीन में बोते हैं तो, बीज में मौजूद विशेष गुणों वाला एक ही तरह का पौधा उगता है.

— गुरु नानक देव

Quote 13. : I am not the born; how can there be either birth or death for me?

— Guru Nanak Dev

In Hindi : मैं जन्मा नहीं हूँ, मेरे लिए कोई भी कैसे मर सकता है या जन्म ले सकता है?

— गुरु नानक देव

Quote 14. : He who has no faith in himself can never have faith in God.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : जिसे खुद पर भरोसा नहीं है वो भगवान पर कभी भरोसा नहीं कर सकता.

— गुरु नानक देव

Quote 15. : The world is a drama, staged in a dream.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : दुनिया सपने में रचा हुआ एक ड्रामा है.

— गुरु नानक देव

Quote 16. : Those who have loved are those that have found God.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : जो लोग प्रेम में सराबोर रहते हैं, उन्हें भगवान मिलते हैं.

— गुरु नानक देव

Quote 17. : I am neither male nor female, nor am I sexless. I am the Peaceful One, whose form is self-effulgent, powerful radiance.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : मैं न तो पुरुष और न ही महिला हूँ, न ही मैं नपुंसक हूँ. मैं एक अमनपसंद हूँ, जिसका रूप स्वत: देदीप्यमान, शक्तिशाली कांति है.

— गुरु नानक देव

Quote 18. : Thou has a thousand eyes and yet not one eye; Thou host a thousand forms and yet not one form.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : तेरे हजार आँखें हैं फिर भी कोई आंख नहीं; तेरे हजार रूप हैं फिर भी कोई रूप नहीं.

— गुरु नानक देव

Quote 19. : Sing the songs of joy to the Lord, serve the Name of the Lord, and become the servant of His servants.

— Guru Nanak Dev

In Hindi : भगवान के लिए खुशी के गीत गाओ, प्रभु के नाम की सेवा करो, और उसके सेवकों के सेवक बन जाओ.

— गुरु नानक देव

Harmandir Sahib Amritsar

हरमिंदर साहिब, अमृतसर

गुरु नानक देव \ Guru Nanak Dev

गुरु नानक देव की जीवनी

नामगुरु नानक देव \ Guru Nanak Dev
जन्म15 अप्रैल 1469
जन्म स्थानतलवंडी (वर्तमान में ननकाना साहिब, पाकिस्तान)
मृत्यु22 सितंबर 1539
मृत्यु स्थानकरतारपुर
पिता का नामकल्यानचंद या मेहता कालू जी
माता का नामतृप्ता देवी
जीवनसाथीसुलक्षणा देवी
धर्मसिखधर्म के संस्थापक
परिवार के बारे में सक्षिप्त जानकारीनानक देव के पिता गाँव में स्थानीय राजस्व प्रशासन के अधिकारी थे. अपने बाल्य काल में नानक देव ने हिन्दी, संस्कृत, फारसी, उर्दू, अरबी आदि कई भाषाएँ सीख ली. उनका विवाह वर्ष 1487 में हुआ और उनके दो पुत्र पहला वर्ष 1491 में और दूसरा 1496 में हुआ. वर्ष 1485 में अपने भैया और भाभी के कहने पर उन्होंने दौलत खान लोधी के स्टोर में अधिकारी के रूप में निकुक्ति ली, जो सुल्तानपुर में मुसलमानों का शासक था.
शिक्षापढ़ने लिखने में नानक देव मन नहीं लगा. 8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया, क्योंकि भगवत्प्राप्ति के संबंध में इनके प्रश्नों के आगे अध्यापकों ने हार मान ली.
प्रेरक कहानियां
  • जब नानक देव 12 वर्ष के थे. उनके पिता ने उन्हें 20 रूपए दिए और अपना एक व्यापर शुरू करने के लिए कहा, ताकि वे व्यापर के विषय में कुछ जान सकें. नानक देव ने 20 रूपये गरीबों व संतों को खाना खिलाने में खर्च कर दिये. जब उनके पिता नें उनसे पुछा – तुम्हारे व्यापर का क्या हुआ? तो उन्होंने उत्तर दिया – मैंने उन पैसों का सच्चा सौदा कर लिया. जिस स्थान पर गुरु नानक जी ने उन गरीबों व संतों को खाना खिलाया था, वहां सच्चा सौदा नाम का गुरुद्वारा स्थित है.
  • नवाब दौलतखान लोधी ने हिसाब-किताब में ग़ड़बड़ी की आशंका में नानक देव को जेल भिजवा दिया. लेकिन जब नवाब को अपनी गलती का पता चला तो उन्होंने नानक देव को छोड़ कर माफी मांगी और प्रधानमंत्री बनाने की पेशकश की, लेकिन गुरु नानक ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. वहां सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) में गुरुद्वारा कोठी साहिब स्थित है.
  • सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) में एक बार गुरु नानक अपने सखा मरदाना के साथ वैन नदी के किनारे बैठे थे, कि अचानक उन्होंने नदी में डुबकी लगा दी. और तीन दिनों तक लापता हो गए, जहाँ पर उन्होंने ईश्वर से साक्षात्कार किया. सभी लोग उन्हें डूबा हुआ समझ रहे थे, लेकिन वे वापस लौटे तो उन्होंने कहा – एक ओंकार सतिनाम. गुरु नानक ने वहाँ एक बेर का बीज बोया, जो आज बहुत बड़ा वृक्ष बन चुका है. वहां गुरुद्वारा बेर साहिब स्थित है.
  • एक बार वे गंगा तट पर खड़े थे तब उन्होंने देखा की कुछ लोग पानी के अन्दर खड़े होकर सूर्य की ओर पूर्व दिशा में देखकर स्वर्ग में पूर्वजों के शांति के लिए पानी डाल रहे थे. गुरु नानक देव भी पानी में गए और वे भी अपने दोनों हाथों से अपने राज्य पंजाब की ओर खड़े हो कर पानी डालने लगे. जब यह देख लोगों ने उनकी गलती के बारे में बताया और पुछा – ऐसा क्यों कर रहे थे, तो उन्होंने उत्तर दिया – अगर गंगा माता का पानी स्वर्ग में आपके पूर्वजों तक पहुँच सकता है, तो पंजाब में मेरे खेतों तक क्यों नहीं पहुँच सकता? जबकि पंजाब तो स्वर्ग से नजदीक है.
उपलब्धियांसिख धर्म की स्थापना
उल्लेखानीय तथ्य
  • 16 साल की उम्र में ही नानक देव जी ने हिन्दू, इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म के शास्त्रों की अच्छी जानकारी प्राप्त कर ली थी.
  • उन्होंने अपने सिध्दान्तों के प्रसार हेतु एक संन्यासी की तरह अपनी पत्नी और दोनों पुत्रों को छोड़कर धर्म के मार्ग पर निकल पड़े. और लोगों को सत्य और प्रेम का पाठ पढ़ाना आरंभ कर दिया. धार्मिक कट्टरता के वातावरण में उदित गुरु नानक जी ने धर्म को उदारता की एक नई परिभाषा दी.
  • 38 साल की उम्र में सुल्तानपुर लोधी के पास स्थित वेन नदी में नहाते समय गुरु नानक ने भगवान का उपदेश सुना कि वह मानवता की सेवा करने के लिए खुद को समर्पित कर दें.  उसके बाद जो पहला वाक्य उनके मुंह से निकला वह यह था कि, “ना तो कोई हिंदू है और ना मुसलमान है.” उन्होंने अपनी सुमधुर सरल वाणी से जनमानस के हृदय को जीत लिया. लोगों को बेहद सरल भाषा में समझाया सभी इंसान एक दूसरे के भाई है. ईश्वर सबके पिता है, फिर एक पिता की संतान होने के नाते हममें ऊंच-नीच कैसी? आदि आदि.
  • उन्होंने जगह-जगह घूमकर तत्कालीन अंधविश्वासों, पाखन्डों आदि का जमकर विरोध किया. वे हिन्दू-मुस्लिम एकता के भारी समर्थक थे. धार्मिक सद्भाव की स्थापना के लिए उन्होंने सभी तीर्थों की यात्रायें की और सभी धर्मों के लोगों को अपना शिष्य बनाया. उन्होंने हिन्दू और इस्लाम दोनों धर्मों की मूल एवं सर्वोत्तम शिक्षाओं को सम्मिश्रित करके एक नए धर्म की स्थापना की. जिसके मूल आधार थे – प्रेम और समानता. यही बाद में सिख धर्म कहलाया. भारत में अपने ज्ञान की ज्योति जलाने के बाद उन्होंने मक्का-मदीना की यात्रा की और वहां के निवासी भी उनसे अत्यंत प्रभावित हुए.
  • 25 वर्ष के भ्रमण के पश्चात् नानक करतारपुर में बस गये और वहीं रहकर उपदेश देने लगे. उनकी वाणी आज भी ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में संगृहीत है.
  • उनके भावुक और कोमल हृदय ने प्रकृति से एकात्म होकर जो अभिव्यक्ति की है, वह निराली है. उनकी भाषा “बहता नीर” थी. जिसमें फारसी, मुल्तानी, पंजाबी, सिंधी, खड़ी बोली, अरबी, संस्कृत और ब्रजभाषा के शब्द समा गए थे.
  • मृत्यु से पहले उन्होंने अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जो बाद में गुरु अंगद देव के नाम से जाने गए.

श्री गुरु नानक देव को शत–शत नमन!!

=============

Note : Hindi translation में पूरी सावधानी रखने के बावजूद Mistake रह सकती है.

निवेदन : 1. कृपया अपने Comments से बताएं आपको यह Post कैसी लगी.

  1. यदि आपके पास Hindi में कोई Inspirational Story, Important Article या अन्य जानकारी हो तो आप हमारे साथ शेयर कर सकते हैं. कृपया अपनी फोटो के साथ हमारी e mail ID : sahisamay.mahesh@gmail.com पर भेजें. आपका Article चयनित होने पर आपकी फोटो के साथ यहाँ प्रकाशित किया जायेगा.

=============

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *