गौतम बुद्ध की जीवनी Gautama Buddha Short Biography in Hindi

∗गौतम बुद्ध की जीवनी∗

( Gautama Buddha Short Biography )

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— मध्यम मार्ग —

“वीणा के तारों को ढीला मत छोड़ दो. ढीला छोड़ देने से उनका सुरीला स्वर नहीं निकलेगा. पर तारों को इतना कसो भी मत कि वे टूट जाएँ.”

– गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध के प्रेरक वचन जरुर पढ़ें

गौतम बुद्ध का जीवन परिचय

नामसिद्धार्थ \ गौतम बुद्ध | Siddharth \ Gautama Buddha
जन्म563 ईसा पूर्व
जन्म स्थानलुम्बिनी
ननिहालदेवदह
मृत्यु463 ईसा पूर्व
मृत्यु स्थानकुशीनगर
पिता का नामशुद्धोधन
माता का नाममहामाया
धर्मजन्म से हिन्दू, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक
परिवार के बारे में सक्षिप्त जानकारी
  • सिद्धार्थ के पिता शाक्य गणराज्य के राजा थे. जिसकी राजधानी कपिलवस्तु थी. उनकी माता मायादेवी का उनके जन्म के  कुछ दिन बाद ही देहांत हो गया. उनका पालन पोषण उनकी मौसी और शुद्धोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती (गौतमी) ने किया.
  • सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र के पास वेद और उपनिषद्‌ तो पढ़े ही, राजकाज और युद्ध-विद्या की भी शिक्षा ली. कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान, रथ हाँकने में कोई उसकी बराबरी नहीं कर पाता. सोलह वर्ष की उम्र में सिद्धार्थ का कोली कन्या यशोधरा के साथ विवाह हुआ. उनके पिता द्वारा कपिलवस्तु में निर्मित वैभवशाली और समस्त भोगों से युक्त महलों में वे यशोधरा के साथ रहने लगे. उनके एक पुत्र राहुल का जन्म हुआ. लेकिन विवाहके बाद उनका मन वैराग्यमें चला गया. और सम्यक सुख-शांति की खोज के लिये उन्होंने अपने परिवार का त्याग कर दिया.
  • सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बनने की कहानी जहाँ चाह, वहाँ राह जरुर पढ़ें.
बोध प्राप्तिबोधगया जरुर पढ़ें — गौतम बुद्ध की प्रेरक शिक्षाएँ (Buddha Teachings)
पहला उपदेशसारनाथ
प्रचार-प्रसार भाषापाली
उल्लेखानीय तथ्य
  • गौतम बुद्ध के आरंभिक जीवन की अनेक घटनाओं से उनके प्राणी मात्र के प्रति दया व अहिंसा के भाव का पता चलता है. वे दुसरे के दुःख को सहन नहीं कर पाते थे.
  • बुद्ध ने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है. उन्होंने यज्ञ और पशु-बलि की निंदा की.
  • बौद्ध धर्म सभी जातियों और पंथों के लिए खुला है. उसमें हर आदमी का स्वागत है. ब्राह्मण हो या चांडाल, पापी हो या पुण्यात्मा, गृहस्थ हो या ब्रह्मचारी सबके लिए उनका दरवाजा खुला है. उनके धर्म में जात-पाँत, ऊँच-नीच का कोई भेद-भाव नहीं है. बुद्ध के धर्म प्रचार से भिक्षुओं की संख्या बढ़ने लगी. बड़े-बड़े राजा-महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे. शुद्धोधन और राहुल ने भी बौद्ध धर्म की दीक्षा ली.
  • गौतम बुद्ध के उपदेशों एवं प्रवचनों का प्रचार प्रसार सबसे ज्यादा सम्राट अशोक ने किया. कलिंग युद्ध में हुए नरसंहार से व्यथित होकर सम्राट अशोक का ह्रदय परिवर्तन हो गया उन्होंने महात्मा बुद्ध के उपदेशों को अपनाते हुए इन उपदेशों को अभिलेखों द्वारा जन-जन तक पहुँचाया.
  • सम्राट अशोक ने विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम्‌ भूमिका निभाई. मौर्यकाल तक आते-आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि में फैल चुका था.
  • वर्तमान में संस्कृत त्रिपिटक प्रयोजन की परम्परा सिर्फ नेपाल के नेवार जाति में जीवित है.
  • बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर भी बौद्ध धर्म के अनुयायी थे.
बौद्ध धर्म के मुख्य ग्रन्थत्रिपिटक बुद्ध धर्म का मुख्य ग्रन्थ है. यह पाली भाषा में लिखा गया है. यह ग्रन्थ बुद्ध के परिनिर्वाण के पश्चात बुद्ध के द्वारा दिये गये उपदेशों को सूत्रबद्ध करने का सबसे वृहद प्रयास है. बुद्ध के उपदेश को इस ग्रन्थ मे सूत्र (सुत्त) के रुप में प्रस्तुत किया गया है. सुत्रों को वर्ग (वग्ग) में बांधा गया है. वग्ग को निकाय (पिटक) में समाहित किया गया है. निकायों को पिटक (अर्थ: टोकरी) में एकिकृत किया गया है. इस प्रकार से तीन पिटक – 1. विनय पिटक 2. सुत्त पिटक 3. अभिधम्म पिटक निर्मित है. जिन के संयोजन को त्रि-पिटक कहा जाता है. हिन्दू धर्म में वेदों का जो स्थान है, बौद्ध धर्म में वही स्थान पिटकों का है.
बौद्ध धर्म की शाखाये
  • थेरवाद : थेरवाद (हीनयान) बुद्ध के मौलिक उपदेश ही मानता है.
  • महायान : महायान के कुछ संघ बुद्ध की पूजा करता हैं.
बौद्ध धर्म के अनुयायीविश्व में आज करीब 1 अरब 80 करोड़ बौद्ध धर्म के अनुयायी है. जो विश्व की लगभग 25%जनसंख्या है. विश्व के कई देशों में बौधों की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है. इन देशों में बौधों की approximate जनसंख्या : – लाओस – 98%, मंगोलिया – 98%, कम्बोडिया – 97%, जापान – 96%, थाईलैण्ड – 95%, ताइवान – 95%, भूटान – 94%, हांगकांग – 93%, चीन – 91%, म्यान्मार – 90%, मकाउ – 90%, वियतनाम – 85%, उत्तर कोरिया – 73%, श्रीलंका – 71%, तिब्बत – 70%, सिंगापुर – 67%, क्रिसमस द्विप – 67%, दक्षिण कोरिया – 54%.
बुद्ध के महत्वपूर्ण स्थल (Important Places)श्रावस्ती (Sravasti), साँची (Sanchi), बौद्धनाथ (Boudhanath), बगान (Bagan), बोरोबुदुर (Borobudur), स्वयंभूनाथ (Swayambhunath), कपिलवस्तु (Kapilvastu), कुशीनगर (Kushinagar), बोधगया (Bodhgaya), लुम्बिनी (Lumbini), देवदह (Devdaha), सारनाथ (Sarnath), वैशाली (Vaishali).

गौतम बुद्ध के प्रेरक प्रसंग जरुर पढ़ें

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